देखो श्री वृन्दाविपिन प्रभाइ |
सब तीरथ धामनि फिर आवत देखत उपजत भाई ||
अचरज कहा व्यास सुख वर्णत, थके रसिक ताहि गाई |
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (30)
ओह सखी, श्री वृंदावन धाम की भव्यता और प्रभाव को देखो, यहां तक कि अन्य सभी तीर्थ भी यहीं आगए हैं । श्री हरिराम व्यास इस आश्चर्यजनक सर्वोच्च रस का वर्णन करते हैं, जिसे बहुत ही कम लोग जानते हैं एवं पाए हैं, जो रसिक संत गायन कर थक गए, वह रस श्री धाम वृंदावन में बरस रहा है ।
सब तीरथ धामनि फिर आवत देखत उपजत भाई ||
अचरज कहा व्यास सुख वर्णत, थके रसिक ताहि गाई |
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (30)
ओह सखी, श्री वृंदावन धाम की भव्यता और प्रभाव को देखो, यहां तक कि अन्य सभी तीर्थ भी यहीं आगए हैं । श्री हरिराम व्यास इस आश्चर्यजनक सर्वोच्च रस का वर्णन करते हैं, जिसे बहुत ही कम लोग जानते हैं एवं पाए हैं, जो रसिक संत गायन कर थक गए, वह रस श्री धाम वृंदावन में बरस रहा है ।

