स्वामिनी कब यौं तुम्हे लड़ाऊँ - श्री अली किशोरी, श्री किशोरी अली ग्रंथवाली

स्वामिनी कब यौं तुम्हे लड़ाऊँ - श्री अली किशोरी, श्री किशोरी अली ग्रंथवाली

स्वामिनी कब यौं तुम्हे लड़ाऊँ,
सटकारे कारे केशनी में, सुरभित तेल लगाऊं ||

- श्री अली किशोरी, श्री किशोरी अली ग्रंथवाली

श्री राधे, ऐसा कब होगा कि आपकी प्रेम पूर्वक मैं सेवा और लाड़ लड़ाउंगी और आपके चिकने और लम्बे कारे केशों में सुगन्धित तेल लगाउंगी ?