श्री बिहारीदास परमारथी मिली, कहत सुनत सुख पाई।
यह रस जस दुर्लभ भयो, संसारहि न सुहाई॥
- श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (231)
सच्चे परमार्थी जन को परस्पर श्री युगल रस एवं युगल यश को ही कहना, सुनना एवं चिंतन करना चाहिए। यह रस इतना दुर्लभ है कि संसारी लोगों को यह सुनकर सुहाएगा ही नहीं।
यह रस जस दुर्लभ भयो, संसारहि न सुहाई॥
- श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (231)
सच्चे परमार्थी जन को परस्पर श्री युगल रस एवं युगल यश को ही कहना, सुनना एवं चिंतन करना चाहिए। यह रस इतना दुर्लभ है कि संसारी लोगों को यह सुनकर सुहाएगा ही नहीं।

