(राग देस)
“राधा नाम की गति न्यारी |
सपनेहुँ रसना पर आवत, होत विवस बन कुञ्ज बिहारी ||
सुन्दर दिव्य किशोर वैसनव वाणी मधुर रहत यक सारी |
श्री वृन्दावन धाम निरंतर पावत ललितकिशोरी वारी ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (206)
राधा नाम कि महिमा अपरम्पार है। यदि सपने में भी कोई राधा नाम पुकारता है, तो यह राधा नाम ठाकुर जी को उस जीव के समीप आने पर विवश कर देता है | श्री वृन्दावन धाम के सुन्दर दिव्य किशोर किशोरी अर्थात युगल सरकार, रसिक वैष्णव वाणी, और समस्त मधुर वातावरण बरबस भक्त हृदय को मोहने वाला है | श्री ललित किशोरी के शब्दों में वह नित्य श्री वृन्दावन धाम को पाकर बार बार बलिहार जाते हैं की |
“राधा नाम की गति न्यारी |
सपनेहुँ रसना पर आवत, होत विवस बन कुञ्ज बिहारी ||
सुन्दर दिव्य किशोर वैसनव वाणी मधुर रहत यक सारी |
श्री वृन्दावन धाम निरंतर पावत ललितकिशोरी वारी ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (206)
राधा नाम कि महिमा अपरम्पार है। यदि सपने में भी कोई राधा नाम पुकारता है, तो यह राधा नाम ठाकुर जी को उस जीव के समीप आने पर विवश कर देता है | श्री वृन्दावन धाम के सुन्दर दिव्य किशोर किशोरी अर्थात युगल सरकार, रसिक वैष्णव वाणी, और समस्त मधुर वातावरण बरबस भक्त हृदय को मोहने वाला है | श्री ललित किशोरी के शब्दों में वह नित्य श्री वृन्दावन धाम को पाकर बार बार बलिहार जाते हैं की |

