किशोरी अब मोरी कुमति हरो |
निसदिन तुव चरनन अनुरागी, असी कृपा करो | |
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१५२)
किशोरीजी अब मेरी कुमति को आप ही ठीक करिए। अब तो ऐसी कृपा करिये कि निरंतर आपके चरणों कि यह अनुरागी बनी रहे।
निसदिन तुव चरनन अनुरागी, असी कृपा करो | |
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१५२)
किशोरीजी अब मेरी कुमति को आप ही ठीक करिए। अब तो ऐसी कृपा करिये कि निरंतर आपके चरणों कि यह अनुरागी बनी रहे।

