कोऊ नहीं अपनो सगो - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (50)

कोऊ नहीं अपनो सगो - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (50)

कोऊ नहीं अपनो सगो, बिन राधा गोपाल।
नारायण तू वृथा मति, परै जगत के जाल॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (50)

हृदय में इस सत्य को भलीभाँति प्रतिष्ठित कर लो कि श्रीराधा-कृष्ण के अतिरिक्त इस अनंत ब्रह्मांड में तुम्हारा अपना कोई भी नहीं है। यह नश्वर जगत केवल एक मायावी जाल है, जिसमें अपने अमूल्य मन को फँसाना सर्वथा निरर्थक और आत्मघाती है।