सेव्य हमारे हैं सदा, वृन्दाविपिन बिलास।
नंदनंदन वृषभानुजा, चरन अनन्य उपास॥
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (3)
हमारा सेव्य तत्व सदा ही एकमात्र वृन्दावन धाम है, जहाँ श्री युगल वर श्री नंदनंदन और श्री वृषभानुनंदिनी नित्य वास करते हैं; उन युगल चरणों के ही हम अनन्य उपासक हैं।

