जहाँ कृष्ण राधा तहाँ, जहँ राधा तहँ कृष्ण - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक जी की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (4)

जहाँ कृष्ण राधा तहाँ, जहँ राधा तहँ कृष्ण - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक जी की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (4)

जहाँ कृष्ण राधा तहाँ, जहँ राधा तहँ कृष्ण |
न्यारे निमिषा न होत दोउ, समुझि करौ यह प्रश्न  | |

- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक जी की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (4)

जहाँ श्री कृष्ण हैं वहीँ श्री राधा हैं, और जहाँ श्री राधा हैं वहीँ श्री कृष्ण हैं, यह दोनों एक पल के लिए भी अलग नहीं होते, इस बात को ठीक से जान कर ही प्रश्न करो कि श्री बांके बिहारी जी के साथ श्री राधारानी क्यों नहीं प्रकट रूप में विराजमान हैं।