रसिकन की गति रसिकन जाने | कह कृपालु यह दिव्य विषय किमी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, रसिया माधुरी

रसिकन की गति रसिकन जाने | कह कृपालु यह दिव्य विषय किमी - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, रसिया माधुरी

रसिकन की गति रसिकन जाने |
कह कृपालु यह दिव्य विषय किमी, जाने विषय रस साने ||

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, रसिया - माधुरी (15)

रसिक संत की गति केवल रसिक ही जानते हैं। जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं कि रसिक संतों की बातें, आचरण दिव्य होते हैं, साधारण जीव जो विषय भोग करते हैं, वो कैसे समझ सकते हैं?