कूँची नित्य विहार की - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (530)

कूँची नित्य विहार की - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (530)

कूँची नित्य बिहार की, श्री हरिदासी कै हाथ।
सेवत साधक सिद्ध सब, जांचत नावत मांथ॥
- श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (530)

वह परम रसमय 'नित्य-विहार', जिसकी प्राप्ति बड़े-बड़े साधकों एवं सिद्धों के लिए भी अत्यंत दुर्लभ है, उस निकुंज-धाम की चाबी रसिकेश्वर श्रीस्वामी हरिदासजी के कर-कमलों में सुरक्षित है। उन ललिता अवतार श्री स्वामी जू की अहैतुकी कृपा के बिना इस गहन निकुंज-रहस्य में प्रवेश पाना सर्वथा असंभव है।