श्रीजी का मंदिर, वृन्दावन

श्रीजी का मंदिर, वृन्दावन

वृंदावन में रेतिया बाजार(लोई बाज़ार) में स्थित श्री जी बड़ी कुंज , जगद्गुरु श्री निम्बार्काचार्य द्वारा स्थापित निंबार्क सम्प्रदाय के केंद्र के रूप में माना जाता है। श्री निम्बार्काचार्य जी को श्री कृष्ण का  'सुदर्शनचक्र'  के अवतार माना जाता है। 14 वीं -15 वीं शताब्दी में श्री भट्टदेवाचार्य रसिक संत लेखक ने अपनी पुस्तक "युगल शतक" में श्री निम्बार्काचार्य की रासोपासना मार्ग का वर्णन किया, और उन्ही के शिष्य श्री हरिव्यास देवाचार्य जी ने अपने ग्रन्थ 'महावाणी' (जो की रसोपाससना में  शीर्ष ग्रन्थ भी माना जाता है) में रसोपासना का विस्तार से वर्णन किया। 19 वीं और 20 वीं शताब्दी में श्री 'श्रीजी महाराज' को  निम्बार्क सम्प्रदाय के लिए सम्मानित आचार्य माना जाता था और वर्तमान में श्री श्याम शरण देवाचार्य को आदरणीय आचार्य माना जाता है। निम्बार्क सम्प्रदाय में, श्री राधा कृष्ण की युगल उपासना ही मुख्य भक्ति मानी जाती।  निम्बार्क सम्प्रदाय के कई अन्य कुन्ज भी स्थापित है श्री वृंदावन के स्थानो पर जैसे पन्ना कुन्ज, श्री जी की छोटी कुन्ज इत्यादि।

मंदिर का समय:
सवेरे 5:30 बजे - मंगला आरती
सवेरे 8:30 बजे - श्रृंगार आरती
दोपहर 12:00 बजे - राजभोग आरती
शाम 6:30 बजे - संध्या आरती
शाम  8:30 बजे - शयन आरती

स्थान:
श्री जी बड़ी कुंज  श्री वृंदावन धाम में रेतिया बाजार(लोई बाज़ार) में स्थित हैै।