तेइ रसिक अनन्य जानिवे - श्री हरिराम व्यास  - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (178)

तेइ रसिक अनन्य जानिवे - श्री हरिराम व्यास - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (178)

तेइ रसिक अनन्य जानिवे,
तिनकी जीवनि धन वृन्दावन, जीवत मरत बखानिवै ||

- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (178)

जिसका जीवन धन एक मात्र वृन्दावन है उसे ही रसिक अनन्य जानिये ।