हित तौ कीजै कमलनैन सौं - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, अष्टादश पद (07)

हित तौ कीजै कमलनैन सौं - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, अष्टादश पद (07)

हित तौ कीजै कमलनैन सौं, जा हित के आगैं और हित लागै फ़ीकौ |
कै हित कीजै साधु-संगति सौं, ज्यौं कलमष जाय सब जी कौ | | 

- ललिता अवतार श्री हरिदास जी, अष्टादश पद (07)

कमल के समान नेत्र हैं जिनके, ऐसे कमल नयन श्री बिहारीजी से ही हित -प्रेम करना चाहिए क्यूंकि उसके आगे सांसारिक एवं मोक्ष तक की कामना तुच्छ लगती है या साधु संतों की संगती से प्रेम करना चाहिए जिससे हृदय के समस्त कल्मष (अशुभ वासनाएं) सब प्रकार से नष्ट होती हैं।