यस्यास्तत्सुकुमार सुन्दर पदोन्मीलन्नखेन्दुच्छटा - श्री राधा सुधा निधि (131)

यस्यास्तत्सुकुमार सुन्दर पदोन्मीलन्नखेन्दुच्छटा - श्री राधा सुधा निधि (131)

यस्यास्तत्सुकुमार सुन्दर पदोन्मीलन्नखेन्दुच्छटा, लावण्यैक लवोपजीवि सकल श्यामा मणी मण्डलम् |
शुद्ध प्रेम-विलास मूर्तिरधिकोन्मीलन्महा माधुरी, धारा-सार-धुरीण-केलि-विभवा सा राधिका मे गतिः ||
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि (131)

जिनके उन सुकुमार एवं सुन्दर चरणों के प्रफुल्लित नखेन्दु की छटा के लावण्य का लव-मात्र ही समस्त श्यामा-रमणी मणियों के पूर्ण मण्डल का जीवन है। जो शुद्ध प्रेम-विलास की मूर्ति हैं एवं जो अधिकाधिक रूप में उन्मीलित महा माधुरी-धारा के सम्पतन को धारण करने में समर्थ है, वे केलि-विभव स्वरूपा श्रीराधा ही मेरी गति हैं।