जिननें प्रेम प्यालो पियो - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (152)

जिननें प्रेम प्यालो पियो - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (152)

जिननें प्रेम प्यालो पियो, झूमत तिनके नैन।
नारायण वा रूप मद, छके रहैं दिन रैन॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (152)

जिन जीवों ने युगल-प्रेम का प्याला पिया है, उनके नैन रस में विभोर होकर झूमते रहते हैं। श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि वे पूर्ण रूप से छके रहते हैं और नित्य रूप-माधुरी का पान करते रहते हैं।