कोऊ मदमाते भांग के, कोउ अमल अफीम - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (297)

कोऊ मदमाते भांग के, कोउ अमल अफीम - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (297)

कोऊ मदमाते भांग के, कोउ अमल अफीम,
श्री बिहारीदास रसमाधुरी, मत्त मुदित तोफीम॥

- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (297)

श्री बिहारी दास जी कहते हैं कि संसार में कोई भाँग के नशे में मदमस्त है, तो कोई अफीम के अमल में डूबा हुआ है। परंतु जो रसिक जन हैं, वे तो केवल श्री प्रिया-प्रियतम अनन्य प्रेमामृत के नशे में नित्य मग्न और परमानन्दित रहते हैं, जिसके सम्मुख संसार के अन्य सभी नशे फीके और तुच्छ हैं।