प्यारी मोहि दीजै श्री वृन्दावन वास - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१४०)

प्यारी मोहि दीजै श्री वृन्दावन वास - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१४०)

प्यारी मोहि दीजै श्री वृन्दावन वास।
छिन प्रति नव अनुराग बढ़त जहाँ भक्त प्रेम रस रास॥

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१४०)

प्यारी जू मुझे अब आप श्री वृंदावन का वास दीजिए जहाँ भक्त हृदय में प्रेम रस एवं रास का नित्य ही नव नवायमान अनुराग बढ़ता है ।