श्री वृंदावन प्रगट सदा सुख चैन।
अति उदार सुकुमारि नागरी रोम रोम सुख दैन।
हाव भाव अँग-अंग विलोकत धन्य व्यास के नैन।।
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (13)
इस मृत्युलोक के प्रकट वृन्दावन में नित्य सुख, चैन (रस) बरसता है | सुकुमारी नागरी श्री राधारानी अत्यंत उदार हैं जो नित्य ही सुख देती हैं (मानो रोम रोम पुलकित हो जाता है रस से) | श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं की वृन्दावन धाम में हमारी श्री प्रिया जी जो कि रस की मूल स्त्रोत हैं, उनकी छवि का दर्शन करके मेरे नैन धन्य हो गए |

