नारायण जिनके ह्रदय, प्रीति लगी घन श्याम।
जाति पांति कुल सों गये, रहे न काहू काम॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (176)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि जिनके हृदय में घनश्याम की सच्ची प्रीति लग जाती है, उनके लिए जाति-पाँति, कुल आदि का कुछ भी काम नहीं रह जाता; मानो सब कुछ नष्ट हो जाता है।

