निश्चय तन मन प्रेम सों  - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (418)

निश्चय तन मन प्रेम सों - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (418)

निश्चय तन मन प्रेम सों, सुमिरि बिहारिनि बाल।
 आजु को लाहौ लीजिये, कौन देख्यौ काल्ह॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (418)

 मैं तुमसे स्पष्ट कहता हूँ कि तुम तन-मन-प्राण से सर्वोपरि नित्य-विहारिनी जू के सुमिरन का लाभ आज ही ले लो, कल का दिन किसने देखा है।