वृन्दावन झलकनि झमक  - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (12)

वृन्दावन झलकनि झमक - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (12)

वृन्दावन झलकनि झमक, फूले नैंन निहारि।
 रवि ससि दुतिधर जहाँ लगि, ते सब डारे वारि॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (12)

श्री वृन्दावन की झलक को प्रेमोत्तफुल्ल नेत्रों से देखना चाहिए। यह झलक इस प्रकार की है कि इस पर सूर्य, चंद्र आदि प्रकाशवान वस्तुएँ न्योछावर की जा सकती हैं।