जोत नैनन मैं युगल युगल जगदीखै |
सोवत जगत चलत चितवत रस केलि कथा अनुरागै ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१५२)
जिन नैनों में युगल सरकार ही केवल बसते हैं एवं हर जगह वह युगल सरकार श्री राधा कृष्ण को ही देखते हैं, ऐसे व्यक्ति सोते, जागते, एवं चलते फिरते, चित्त से केलि कथा रस को ही पीते हैं ।
सोवत जगत चलत चितवत रस केलि कथा अनुरागै ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (१५२)
जिन नैनों में युगल सरकार ही केवल बसते हैं एवं हर जगह वह युगल सरकार श्री राधा कृष्ण को ही देखते हैं, ऐसे व्यक्ति सोते, जागते, एवं चलते फिरते, चित्त से केलि कथा रस को ही पीते हैं ।

