राधिका रमन जय,
जाके चरन कमल सेवत नित, रसिक अनन्य भये सब निर्भय।
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (60)
जाके चरन कमल सेवत नित, रसिक अनन्य भये सब निर्भय।
- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (60)
जिनके कमल के समान युगल चरणों का नित्य सेवन करके समस्त रसिक निर्भय हो गए हैं, ऐसे युगल सरकार श्री राधा रमन की जय हो ।

