नारायण हरि भक्ति की, प्रथम यही पहचाँन।
आप अमानी है रहै, देत और को मान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (95)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि श्री हरि की भक्ति की प्रथम पहचान यही है कि भक्त स्वयं मान-बड़ाई की इच्छा से रहित (अमानी) होकर रहता है और अन्यों को सदैव मान-सम्मान देता है।
आप अमानी है रहै, देत और को मान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (95)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि श्री हरि की भक्ति की प्रथम पहचान यही है कि भक्त स्वयं मान-बड़ाई की इच्छा से रहित (अमानी) होकर रहता है और अन्यों को सदैव मान-सम्मान देता है।

