बसिवौ वृन्दाविपिन कौ, यह मन में धरी लेहु।
कीजै ऐसौ नेम दृढ़, या रज में परै देह॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (69)
अपने मन में वृन्दावन वास का दृढ़ निश्चय कर लेना चाहिए और ऐसा दृढ़ व्रत लेना चाहिए कि यह देह वृन्दावन रज में ही पड़ा रहे (एवं मिल जाए)।
कीजै ऐसौ नेम दृढ़, या रज में परै देह॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (69)
अपने मन में वृन्दावन वास का दृढ़ निश्चय कर लेना चाहिए और ऐसा दृढ़ व्रत लेना चाहिए कि यह देह वृन्दावन रज में ही पड़ा रहे (एवं मिल जाए)।

