संत सभा झांकी नहीं, कियो न हरिगुण गान।
नारायण फिर कौन विधि, तू चाहत कल्यान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (55)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि तूने न तो संतों की सभा में जाकर उनके दर्शन एवं सत्संग का लाभ लिया और न ही कभी श्री हरि के गुणों का गान किया। फिर हे जीव! तू किस आधार पर अपना कल्याण चाहता है? बिना सत्संग और भगवद-भजन के इस संसार-सागर से पार उतरने का अन्य कोई मार्ग ही नहीं है।
नारायण फिर कौन विधि, तू चाहत कल्यान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (55)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि तूने न तो संतों की सभा में जाकर उनके दर्शन एवं सत्संग का लाभ लिया और न ही कभी श्री हरि के गुणों का गान किया। फिर हे जीव! तू किस आधार पर अपना कल्याण चाहता है? बिना सत्संग और भगवद-भजन के इस संसार-सागर से पार उतरने का अन्य कोई मार्ग ही नहीं है।

