यह वृन्दावन मेरी सम्पति, इहलोक परलोक वृन्दावन मेरौ पुरुषार्थ परमार्थ गथु गति।  - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (27)

यह वृन्दावन मेरी सम्पति, इहलोक परलोक वृन्दावन मेरौ पुरुषार्थ परमार्थ गथु गति। - श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (27)

यह वृन्दावन मेरी सम्पति,
इहलोक परलोक वृन्दावन मेरौ पुरुषार्थ परमार्थ गथु गति।

- श्री हरिराम व्यास (विशाखा अवतार) - व्यास वाणी, पूर्वार्ध (27)

केवल श्री वृन्दावन धाम ही मेरी सम्पति है, यह लोक, परलोक, पुरुषार्थ, परमार्थ, पूँजी, और गति सब कुछ वृन्दावन धाम ही है।