मेरौ मन श्री वृन्दावन अटक्यो, राख्यो श्री हरिदास विपुल बल, भूली न इत उत भटक्यो।  - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (154)

मेरौ मन श्री वृन्दावन अटक्यो, राख्यो श्री हरिदास विपुल बल, भूली न इत उत भटक्यो। - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (154)

मेरौ मन श्री वृन्दावन अटक्यो,
राख्यो श्री हरिदास विपुल बल, भूली न इत उत भटक्यो।

- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (154)

श्री बिहारिन देव जी कहते हैं कि स्वामी श्रीहरिदास जी और श्री विट्ठल विपुल देव जी की कृपा से मेरा मन श्री वृन्दावन में ऐसा अटक गया है की भूल कर भी वृन्दावन धाम को छोड़कर वह अब इधर उधर नहीं भटकता।