कर्मणि श्रुति बोधितानि नितरां कुर्वन्तु कुर्वन्तु मा,
गूढाष्चर्य रसाः स्रगादि विषयान्गृह्णन्तु मुञ्चन्तु वा।
कैव भाव-रहस्य पारग-मतिः श्रीराधिका प्रेयसः,
किञ्चिजज्ञेरनुयुज्यतां वहिरहो भ्राम्यद्भिरन्यैरपि ॥
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि (82)
गूढाष्चर्य श्री राधा रस में रंगे रसिक-गण वेदों द्वारा निर्मित कर्मकाण्ड का अनुष्ठान करें या न करें, माला, चन्दन आदि विषय भोग विलास के उपकरण गृहण करें या न करें, इससे उनको न कोई हानि है और न लाभ ही । महामूर्ख संसारी व्यक्ति एवं सकाम जन, जो मृत्युलोक में ही केवल आवागमन करते हैं, वह श्री राधारानी के रस में डूबे हुए रसिक जन के हृदय की स्थिति को क्या समझेंगे एवं उन व्यक्तियों को क्या अधिकार है रसिक जनों के हाव भाव, क्रिया और मुद्रा पर प्रश्न करने का?
गूढाष्चर्य रसाः स्रगादि विषयान्गृह्णन्तु मुञ्चन्तु वा।
कैव भाव-रहस्य पारग-मतिः श्रीराधिका प्रेयसः,
किञ्चिजज्ञेरनुयुज्यतां वहिरहो भ्राम्यद्भिरन्यैरपि ॥
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि (82)
गूढाष्चर्य श्री राधा रस में रंगे रसिक-गण वेदों द्वारा निर्मित कर्मकाण्ड का अनुष्ठान करें या न करें, माला, चन्दन आदि विषय भोग विलास के उपकरण गृहण करें या न करें, इससे उनको न कोई हानि है और न लाभ ही । महामूर्ख संसारी व्यक्ति एवं सकाम जन, जो मृत्युलोक में ही केवल आवागमन करते हैं, वह श्री राधारानी के रस में डूबे हुए रसिक जन के हृदय की स्थिति को क्या समझेंगे एवं उन व्यक्तियों को क्या अधिकार है रसिक जनों के हाव भाव, क्रिया और मुद्रा पर प्रश्न करने का?

