या रस के तभी अधिकारी, कृपा करे जब राधा प्यारी | -श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, रसानंद [7]

या रस के तभी अधिकारी, कृपा करे जब राधा प्यारी | -श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, रसानंद [7]

"या रस के तभी अधिकारी, कृपा करे जब राधा प्यारी |"
-श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, रसानंद [7]

नित्य विहार रुपी दुर्लभ रस में तभी कोई अधिकारी बन सकता है जब श्री राधा प्यारी की कृपा हो अन्यथा नहीं।