श्याम हौं कब ह्वै हौं ब्रज धूरि - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, दैन्य माधुरी (88)

श्याम हौं कब ह्वै हौं ब्रज धूरि - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, दैन्य माधुरी (88)

श्याम हौं कब ह्वै हौं ब्रज धूरि,
ह्वै ब्रज धूरि अंग लपटै हौं, उर आनंद भर पूरी | जेहि ब्रज रज कहँ रसिकन मानत, प्राण संजीवनी मूरि ||

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, प्रेम रस मदिरा, दैन्य माधुरी (88)