प्यारी तेरे नैना री अति बांके,
ललित त्रिभंगी बिहारी नागर, तैं अपने करि आंके
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जू की वाणी (25)
श्री राधिका, आपकी आंखें वास्तव में तिरछी हैं जो अमृत से भरी हैं। श्री ललित त्रिभंगी (जो तीन स्थानों नेत्र ,गर्दन और कमर पर मुड़ी हुई है और झुकी हुई है) बिहारी जी उन्हें (श्री राधा) अपने अंक में किया हुआ है।
ललित त्रिभंगी बिहारी नागर, तैं अपने करि आंके
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विठ्ठल विपुल देव जू की वाणी (25)
श्री राधिका, आपकी आंखें वास्तव में तिरछी हैं जो अमृत से भरी हैं। श्री ललित त्रिभंगी (जो तीन स्थानों नेत्र ,गर्दन और कमर पर मुड़ी हुई है और झुकी हुई है) बिहारी जी उन्हें (श्री राधा) अपने अंक में किया हुआ है।

