मन्दीकृत्य मुकुन्द सुन्दर पदद्वन्द्वारविन्दामल,
प्रेमानन्दममन्दमिन्दु-तिलकाद्युन्माद कन्दं परम् ||
राधा-केलि-कथा-रसाम्बुधि चलद्वीचीभिरान्दोलितं,
वृन्दारण्य निकुञ्ज मन्दिर वरालिन्दे मनो नन्दतु ||
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि (142)
श्री कृष्ण के सुन्दर चरणों का अमल प्रेमानन्द देवी देवताओं और शिवजी आदि के लिये आनंद का ही मूल स्त्रोत है, किन्तु मेरा मन उसको भी शिथिल करके श्रीराधा-केलि कथा-रस-समुद्र की चञ्चल लहरियों से आन्दोलित वृन्दावनस्थ निकुंज-मन्दिर के श्रेष्ठ-प्राङ्गण में आनन्द को प्राप्त हो ।
प्रेमानन्दममन्दमिन्दु-तिलकाद्युन्माद कन्दं परम् ||
राधा-केलि-कथा-रसाम्बुधि चलद्वीचीभिरान्दोलितं,
वृन्दारण्य निकुञ्ज मन्दिर वरालिन्दे मनो नन्दतु ||
- मुरली अवतार श्री हित हरिवंश महाप्रभु - श्री राधा सुधा निधि (142)
श्री कृष्ण के सुन्दर चरणों का अमल प्रेमानन्द देवी देवताओं और शिवजी आदि के लिये आनंद का ही मूल स्त्रोत है, किन्तु मेरा मन उसको भी शिथिल करके श्रीराधा-केलि कथा-रस-समुद्र की चञ्चल लहरियों से आन्दोलित वृन्दावनस्थ निकुंज-मन्दिर के श्रेष्ठ-प्राङ्गण में आनन्द को प्राप्त हो ।

