चन्द्रबदन मृग सम नयन, गति गयंद मृदुबोल।
नारायण हरिभक्ति बिन, यह कौडी के मोल॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (71)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि मुख चन्द्रमा के समान सुन्दर हो, नेत्र मृग के समान चंचल और नयनाभिराम हों, चाल गजराज जैसी मतवाली हो और वाणी कोमल एवं मधुर हो—परन्तु यदि हृदय में श्री हरि की भक्ति नहीं है, तो यह सारा शारीरिक सौंदर्य और गुण केवल एक कौड़ी के मोल (पूर्णतः मूल्यहीन) है। बिना भक्ति के यह सब व्यर्थ है।
नारायण हरिभक्ति बिन, यह कौडी के मोल॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (71)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि मुख चन्द्रमा के समान सुन्दर हो, नेत्र मृग के समान चंचल और नयनाभिराम हों, चाल गजराज जैसी मतवाली हो और वाणी कोमल एवं मधुर हो—परन्तु यदि हृदय में श्री हरि की भक्ति नहीं है, तो यह सारा शारीरिक सौंदर्य और गुण केवल एक कौड़ी के मोल (पूर्णतः मूल्यहीन) है। बिना भक्ति के यह सब व्यर्थ है।

