जै जै वृन्दावन रजधानी - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (31)

जै जै वृन्दावन रजधानी - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (31)

(राग आसावरी)
जै जै वृन्दावन रजधानी,
जहाँ विराजत मोहन राजा श्री राधा सी महारानी।
सदा सनातन एक रस जोरी महिमा निगम न जानी।
श्री हरिप्रिया हितु निज दासी रहती सदा अगवानी।

- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सहज सुख (31)


सभी रसिक संतों की राजधानी श्री वृन्दावन धाम की जय हो, जय हो, जहां श्री राधा सर्वोच्च रानी ('महारानी') और श्री कृष्ण राजा (’महाराज') हैं। यह दिव्य युगल और वृंदावन का निरंतर अमृत शाश्वत है, जिसकी दिव्यता भी वेदों की समझ से परे है। दिव्य युगल के सेवक श्री हरिप्रिया सहचरी हमेशा इस दिव्य निवास यानी श्री वृंदावन को निहारती हैं।