हमारी लड़ैती साहिबिनी - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी,  रस के पद (104)

हमारी लड़ैती साहिबिनी - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस के पद (104)

हमारी लड़ैती साहिबिनी,
जाके लाल अधीन सदाई ऐसी है परवीनी।
रोम रोम आनंद भरी है छिन्न छिन्न रूप नवीनी।।
श्री हरिदासी रसिक सिरोमनि ललित केलि रस भीनी।

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, रस के पद (104)

श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि हमारी श्री राधा रानी ऐसी स्वामिनी हैं जिनके आधीन नित्य ही श्याम सुन्दर रहते हैं। श्री प्रिया जी के रोम रोम में आनंद ही आनंद है और उनका रूप सौंदर्य नित्य नव-नवायमान है। श्री ललित किशोरी कहते हैं कि रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास के द्वारा बरसाया अंतरंग केलि रस बिना प्रयास के श्री राधारानी की करुणा से नित्य ही वह पीते हैं।