(राग धनाश्री)
आज नीकी बनी श्रीराधिका नागरी।
ब्रज जुवति जूथ में रूप अरु चतुरई,
सील सिंगार गुन सबनितें आगरी ॥
कमल दक्षिण भुजा वाम भुज अंस सखि,
गाँवती सरस मिलि मधुर सुर राग री।
सकल विद्या विदित रहसि 'हरिवंश हित’,
मिलत नव कुञ्ज वर स्याम बड़ भाग री॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (25)
भावार्थ- “हे सखि ! आज नागरी राधिका बड़ी नीकी (सुन्दर) बनी हैं। वे समस्त ब्रज युवती समूह में रूप, चातुर्य शील श्रृंगार एव गुण सभी बातो में सबसे बढ़ी-चढ़ी श्रेष्ठ हैं।उनके दाहिने हाथ में कमल है और वे अपनी बायीं भुजा सखि के कंघे पर रखे हुए सब सहचरियों से मिलकर सरस एव मधुर राग का स्वर पूर्वक गान कर रही हैं। श्रीहित हरिवंश चंद्र कहते हैं -" ये राधा समस्त विद्याओं की ज्ञाता है।अहो ! वे आज बड़भागी श्रीश्यामसुन्दर से रहस्य निकुंजवर मंन्दिर में (आनंद पूर्वक) मिल रही हैं” ।
आज नीकी बनी श्रीराधिका नागरी।
ब्रज जुवति जूथ में रूप अरु चतुरई,
सील सिंगार गुन सबनितें आगरी ॥
कमल दक्षिण भुजा वाम भुज अंस सखि,
गाँवती सरस मिलि मधुर सुर राग री।
सकल विद्या विदित रहसि 'हरिवंश हित’,
मिलत नव कुञ्ज वर स्याम बड़ भाग री॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, हित चौरासी (25)
भावार्थ- “हे सखि ! आज नागरी राधिका बड़ी नीकी (सुन्दर) बनी हैं। वे समस्त ब्रज युवती समूह में रूप, चातुर्य शील श्रृंगार एव गुण सभी बातो में सबसे बढ़ी-चढ़ी श्रेष्ठ हैं।उनके दाहिने हाथ में कमल है और वे अपनी बायीं भुजा सखि के कंघे पर रखे हुए सब सहचरियों से मिलकर सरस एव मधुर राग का स्वर पूर्वक गान कर रही हैं। श्रीहित हरिवंश चंद्र कहते हैं -" ये राधा समस्त विद्याओं की ज्ञाता है।अहो ! वे आज बड़भागी श्रीश्यामसुन्दर से रहस्य निकुंजवर मंन्दिर में (आनंद पूर्वक) मिल रही हैं” ।

