बहुत गई थोरी रही, नारायण अब चेत।
काल चिरैया चुग रही, निशिदिन आयु खेत॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (09)
अरे मनुष्य! बहुत आयु तो व्यतीत हो चुकी, अब तो थोड़ी ही शेष है। अब भी जाग और नित्य श्री राधा–कृष्ण का भजन कर, क्योंकि कालरूपी चिड़िया निरंतर आयुरूपी खेत को चुगती जा रही है।
काल चिरैया चुग रही, निशिदिन आयु खेत॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (09)
अरे मनुष्य! बहुत आयु तो व्यतीत हो चुकी, अब तो थोड़ी ही शेष है। अब भी जाग और नित्य श्री राधा–कृष्ण का भजन कर, क्योंकि कालरूपी चिड़िया निरंतर आयुरूपी खेत को चुगती जा रही है।

