आवै छबि की झलक उर - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (92)

आवै छबि की झलक उर - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (92)

आवै छबि की झलक उर, झलकै नैनन वारि।
चिंतत श्यामल गौर तन, सकहि न तनहिं संभारि॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (92)

वृन्दावन में वास करते हुए हृदय में गौर-श्याम बसे हों, नैनों से प्रेमाश्रु झलकते हों, तथा परम प्रेमास्पद श्री राधा-कृष्ण का स्मरण करते-करते तन की भी सुध-बुध न रहे।