श्री राधा पद किंकरी, भाव जासु हिय होये।
वृन्दावन रस कौ मधुर, स्वाद लहै है सोय॥
- श्री किशोर अली, किशोरी अली ग्रंथवाली (1040)
सर्वोत्तम वृन्दावन-रस का मधुर स्वाद वही ग्रहण कर सकता है, जिसके हृदय में श्री राधा के चरणों की किंकरी का भाव हो।
वृन्दावन रस कौ मधुर, स्वाद लहै है सोय॥
- श्री किशोर अली, किशोरी अली ग्रंथवाली (1040)
सर्वोत्तम वृन्दावन-रस का मधुर स्वाद वही ग्रहण कर सकता है, जिसके हृदय में श्री राधा के चरणों की किंकरी का भाव हो।

