नारायण सुख भोग में, तू लम्पट दिन रैन।
अंतसमय आयो निकट, देख खोलके नैन॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (10)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं— “अरे धूर्त मन! तू दिन-रात सुख-भोग में ही लगा रहता है; भजन कब करेगा? तेरा अंत-समय निकट है, अपने नैनों को खोलकर देख।”
अंतसमय आयो निकट, देख खोलके नैन॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (10)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं— “अरे धूर्त मन! तू दिन-रात सुख-भोग में ही लगा रहता है; भजन कब करेगा? तेरा अंत-समय निकट है, अपने नैनों को खोलकर देख।”

