अद्भुत युगल विहार कौ, जिनकै रहै विचार।
सुनी ध्रुव तिनकी चरण रज, लै लै सिर पर धार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मन शिक्षा (64)
जो रसिक श्री श्यामा–श्याम के अद्भुत युगल-विहार के चिंतन-मनन में मग्न रहते हैं, उनकी चरण-रेणु को बार-बार अपने मस्तक पर धारण करते रहना चाहिए।
सुनी ध्रुव तिनकी चरण रज, लै लै सिर पर धार॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, मन शिक्षा (64)
जो रसिक श्री श्यामा–श्याम के अद्भुत युगल-विहार के चिंतन-मनन में मग्न रहते हैं, उनकी चरण-रेणु को बार-बार अपने मस्तक पर धारण करते रहना चाहिए।

