नारायण सत्संग कर, सीख भजन की रीति।
काम क्रोध मद लोभ में, गई आयुबल बीति॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (34)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि सत्संग (संतों के संग) के द्वारा भजन की रीति सीखनी चाहिए, क्योंकि काम, क्रोध, मद, लोभ आदि में ही आयु व्यतीत होती जा रही है।
काम क्रोध मद लोभ में, गई आयुबल बीति॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (34)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि सत्संग (संतों के संग) के द्वारा भजन की रीति सीखनी चाहिए, क्योंकि काम, क्रोध, मद, लोभ आदि में ही आयु व्यतीत होती जा रही है।

