भयो बावरो प्रेम में, डोलत गलियन माहिं।
नारायण हरिलगन में, यह कछु अचरज नाहिं॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (161)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि यदि किसी जीव को श्री राधा-कृष्ण की प्रेमाभक्ति की लगन लग जाए और वह ब्रज की वीथियों में भाव-विह्वल होकर किसी बावरे की तरह विचरण करने लगे, तो इसमें लेशमात्र भी आश्चर्य नहीं है।
नारायण हरिलगन में, यह कछु अचरज नाहिं॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (161)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं कि यदि किसी जीव को श्री राधा-कृष्ण की प्रेमाभक्ति की लगन लग जाए और वह ब्रज की वीथियों में भाव-विह्वल होकर किसी बावरे की तरह विचरण करने लगे, तो इसमें लेशमात्र भी आश्चर्य नहीं है।

