सोई रसिक प्रवीन - श्री ललित किशोरी देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (230)

सोई रसिक प्रवीन - श्री ललित किशोरी देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (230)

सोई रसिक प्रवीन, सेवै नित्य बिहार को।
रहै प्रिया लौ लीन, तन मन मिलि बिछुरे नहीं॥

- श्री ललित किशोरी, श्री ललित किशोरी देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (230)

जगत में वही चतुर-चूड़ामणि, अति प्रवीण तथा उच्च कोटि के रसिक हैं, जो दृढ़ अनन्य-भाव से एकमात्र सर्वोपरि नित्य-विहार-रस का ही सेवन करते हैं और साक्षात् श्री प्रिया जू के अंग-संग से जुड़े रहकर, उनके ही भाव में, उनकी सेवा में, नित्य स्थित रहते हैं।