हमैं तो इक आस किशोरी जू की।
रूप-माधरी निरखें निसि-दिन, छबि-निधि गोरी जू की।
- श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली
हमें तो एक आस श्री किशोरी जी से है। हर क्षण हम श्री राधारानी की गोरी छवि निधि की रूप माधुरी का निरंतर सेवन करते हैं ।
रूप-माधरी निरखें निसि-दिन, छबि-निधि गोरी जू की।
- श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली
हमें तो एक आस श्री किशोरी जी से है। हर क्षण हम श्री राधारानी की गोरी छवि निधि की रूप माधुरी का निरंतर सेवन करते हैं ।

