राधानामैव कार्यं ह्यनुदिन मिलितं साधनाधीश कोटि स्त्याज्यो नीराज्य राधापद-कमल-सुधा सत्पुमर्थाग्र कोटि: ।
राधा पादाब्ज लीला-भुवि जयति सदा मन्द मन्दार कोटिः, श्रीराधा-किङ्करीणां लुठति चरणयोरदभुता सिद्धि कोटिः॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, राधा सुधा निधि (143)
अनुदिन श्रीराधा-नाम के श्रवण-कीर्तनादि के प्राप्त होने पर कोटि कोटि श्रेष्ठ साधन भी परित्याज्य हो जाते हैं। श्रीराधा-पद-कमल-सुधा पर कोटि-कोटि मोक्षादि पुरुषार्थ न्यौछावर हैं। तभी तो श्रीराधा-पादाव्ज- लीला-भुमि श्रीवृन्दावन में अमन्द (वैभव-शाली) कोटि-कोटि कल्पतरु सदा विद्यमान रहते हैं और श्रीराधा-किङ्करी-गणों के चरणों में अद्भुत कोटि कोटि सिद्धियाँ लोटती रहती हैं।
राधा पादाब्ज लीला-भुवि जयति सदा मन्द मन्दार कोटिः, श्रीराधा-किङ्करीणां लुठति चरणयोरदभुता सिद्धि कोटिः॥
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, राधा सुधा निधि (143)
अनुदिन श्रीराधा-नाम के श्रवण-कीर्तनादि के प्राप्त होने पर कोटि कोटि श्रेष्ठ साधन भी परित्याज्य हो जाते हैं। श्रीराधा-पद-कमल-सुधा पर कोटि-कोटि मोक्षादि पुरुषार्थ न्यौछावर हैं। तभी तो श्रीराधा-पादाव्ज- लीला-भुमि श्रीवृन्दावन में अमन्द (वैभव-शाली) कोटि-कोटि कल्पतरु सदा विद्यमान रहते हैं और श्रीराधा-किङ्करी-गणों के चरणों में अद्भुत कोटि कोटि सिद्धियाँ लोटती रहती हैं।

