रसिक कहे सोइ भली, बुरी न मानो लेश।
पद रज लें सर पर धरौं, यह व्यासै उपदेश॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (20)
रसिक संतों की आज्ञा में ही हमारा परम कल्याण समाहित है, अतः उसे कदापि अन्यथा नहीं लेना चाहिए और न ही बुरा मानना चाहिए। श्री हरिराम व्यास जी के अनुसार, यही सर्वोपरि उपदेश है कि श्री राधा रानी के अनन्य अनुरागियों एवं रसिक संतों की चरण-रज को सदैव अपने मस्तक पर धारण करना चाहिए।
पद रज लें सर पर धरौं, यह व्यासै उपदेश॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (20)
रसिक संतों की आज्ञा में ही हमारा परम कल्याण समाहित है, अतः उसे कदापि अन्यथा नहीं लेना चाहिए और न ही बुरा मानना चाहिए। श्री हरिराम व्यास जी के अनुसार, यही सर्वोपरि उपदेश है कि श्री राधा रानी के अनन्य अनुरागियों एवं रसिक संतों की चरण-रज को सदैव अपने मस्तक पर धारण करना चाहिए।

