रूप रंग सुन्दर घनो, चतुर कुलवती नार।
नारायण तौ का भयो, प्रीतम करत न प्यार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (70)
यदि कोई स्त्री अत्यंत सुंदर, रूपवान, चतुर तथा कलाओं की ज्ञाता हो, तथापि यदि वह प्रियतम श्री कृष्ण की भक्ति अथवा उनसे प्रेम नहीं करती, अथवा श्री कृष्ण की प्रीति की पात्र नहीं है, तो उसका वह समस्त वैभव और कौशल पूर्णतः निरर्थक है।
नारायण तौ का भयो, प्रीतम करत न प्यार॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (70)
यदि कोई स्त्री अत्यंत सुंदर, रूपवान, चतुर तथा कलाओं की ज्ञाता हो, तथापि यदि वह प्रियतम श्री कृष्ण की भक्ति अथवा उनसे प्रेम नहीं करती, अथवा श्री कृष्ण की प्रीति की पात्र नहीं है, तो उसका वह समस्त वैभव और कौशल पूर्णतः निरर्थक है।

