शब्द, रस, रूप, रस, गंध मन काम - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (45)

शब्द, रस, रूप, रस, गंध मन काम - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (45)

शब्द, रस, रूप, रस, गंध मन काम।
दूंगा दिव्य मन कहु चलु ढिग श्यामा॥

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (45)

अपने मन से कहो तू शब्द, रस, रूप, रस, गंध ही तो चाहता है, चल श्री राधा के निकट चल वहां तुझे दिव्य शब्द, रस, रूप, रस, गंध प्राप्त होगा।